13 साल का इंतजार…101 गवाह…तीन दिन की अंतिम बहस और अब फैसला सुरक्षित। NIA कोर्ट ने दलीलें सुनीं, 31 अगस्त को खुलेगा ‘राज’—सियासी गलियारों में भी बढ़ी हलचल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे संवेदनशील और बहुचर्चित मामलों में शामिल झीरम घाटी नरसंहार अब फैसले की दहलीज पर पहुंच गया है। करीब 13 साल के लंबे इंतजार के बाद NIA की स्पेशल कोर्ट में मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 31 अगस्त 2026 को स्पेशल कोर्ट इस हाई प्रोफाइल मामले में अपना फैसला सुनाएगी।
झीरम का फैसला केवल एक आपराधिक मामले का निर्णय नहीं होगा। इस मामले से जुड़े राजनीतिक सवालों और वर्षों से चले आ रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच 31 अगस्त की तारीख छत्तीसगढ़ की सियासत के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है।
तीन दिन तक चली आखिरी बहस, 101 गवाहों की गवाही
NIA की स्पेशल कोर्ट में अंतिम सुनवाई लगातार तीन दिनों तक चली। स्पेशल जज अजय सिंह राजपूत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
इस मामले में अदालत ने अब तक 101 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। वहीं, 10 आरोपियों से जुड़े पक्षों को भी अदालत के सामने सुना गया है। अब वर्षों से चली आ रही सुनवाई अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुकी है।
25 मई 2013… जब झीरम में बहा था खून
25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था। इस हमले में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी।
हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि आखिर इस हमले के पीछे पूरी साजिश क्या थी? हमले की परिस्थितियां क्या थीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार था? इन सवालों के जवाब तलाशते हुए मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा।
झीरम सिर्फ केस नहीं, छत्तीसगढ़ की सियासत का सबसे बड़ा सवाल
झीरम घाटी कांड घटना के बाद से ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बना रहा है। अलग-अलग राजनीतिक दलों ने समय-समय पर हमले की साजिश और जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।
यही वजह है कि अब NIA कोर्ट के फैसले को लेकर सिर्फ कानूनी हलकों में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी उत्सुकता और हलचल बढ़ गई है। फैसले में सामने आने वाले तथ्य और अदालत की टिप्पणियां आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा आधार बन सकती हैं।
31 अगस्त को क्या सामने आएगा?
अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 31 अगस्त को अदालत का फैसला क्या होगा? क्या इतने वर्षों से चले आ रहे सवालों को कोई स्पष्ट जवाब मिलेगा? क्या झीरम हमले से जुड़े आरोपों और साजिश की कानूनी तस्वीर साफ होगी? इन सवालों के जवाब का इंतजार पीड़ित परिवारों के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ को है।
फैसले का असर अदालत से बाहर भी दिख सकता है
झीरम घाटी मामले का फैसला कानूनी रूप से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ राजनीतिक तौर पर भी बड़ा असर डाल सकता है। पिछले 13 वर्षों में यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में कई बार चुनावी मुद्दा बना है। सत्ता और विपक्ष एक-दूसरे पर सवाल उठाते रहे हैं।
अब जब अदालत ने अंतिम दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित कर लिया है, तो 31 अगस्त सिर्फ झीरम केस की तारीख नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सियासत के लिए भी एक बड़ा दिन बन गया है।
